उसे किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया

ये आँख भर नहीं गई ये दिल बिखर नहीं गया

मैं सोचता था भूल जाऊँगा जिसे किसी भी दिन
तमाम उम्र उस के प्यार का असर नहीं गया

अगर वो पूछ बैठा कैसे हो, तो क्या कहूँगा मैं?
सो इस लिए भी उस के पास लौट कर नहीं गया

ये घर तुम्हारे बा'द घर ही तो नहीं रहा है दोस्त
तुम्हारे बा'द इस लिए भी तो मैं घर नहीं गया

— Hasan Raqim

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Bekhabri Shayari

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