यहाँ पहले कभी ऐसा कोई मंज़र नहीं देखा
कि मैंने आसमाँ देखा मगर छू कर नहीं देखा
शिकायत यह नहीं मुझको कि उसने साथ छोड़ा है
गिला इतना कि उसने फिर कभी मुड़कर नहीं देखा
ये जिम्मेदारियों ने इस क़दर से बाँध रक्खा है
बहुत दिन हो गए है मैंने अपना घर नहीं देखा
ज़रा सा तुम ठहर जाओ तो जी भर देख लूँ तुमको
कि मैंने चाँद देखा है मगर शब भर नहीं देखा
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