दिल जैसी जब कोई चीज़ बनाऊँगा
पहले ऊँची सी दहलीज़ बनाऊँगा
माँ बाबास बच्चे दूर न रह पाएँ
इक दिन ऐसी इक तावीज़ बनाऊँगा
जो भी उस को पहने वो इंसान दिखे
मैं कुछ ऐसी एक कमीज़ बनाऊँगा
रो रो कर मुस्काएँगे सब दिल वाले
प्रेम कहानी ख़ूब लज़ीज़ बनाऊँगा
गर अब कोई दोस्त बनाऊँगा भी तो
उस को मैं ज़्यादा न अज़ीज़ बनाऊँगा
— Irshad Siddique "Shibu"















