सगे भाई के जब झगड़े हुए हैं
तभी दुश्मन के घर जलसे हुए हैं
जनाज़ा बाप का रक्खा हुआ है
सभी बटवारे में उलझे हुए हैं
ज़बाँ ने जब से सच बोला है तब से
क़रीबी लोग ही भड़के हुए हैं
छुपा चादर में लेंगे मुस्तफ़ा जी
जो दामन उन का बस पकड़े हुए हैं
कि अब आज़ाद कर दे मौला उन को
गुनाहों में जो भी जकड़े हुए हैं
— Irshad Siddique "Shibu"















