ये आँगन ये घर हाँ नहीं छोड़ सकता

ये जन्नत मिरी जाँ नहीं छोड़ सकता

जहाँ छोड़ सकता हूँ मैं यार लेकिन
किसी शर्त पे माँ नहीं छोड़ सकता

कि जो तुम कहो गर तो सब छोड़ दूँगा
मगर मैं ये ईमाँ नहीं छोड़ सकता

ज़बाँ काट दो या क़लम कर दो सर तुम
मुसलमान कुरआँ नहीं छोड़ सकता

कि है छूटती ट्रेन तो छूट जाए
मगर चाय तो जाँ नहीं छोड़ सकता

— Irshad Siddique "Shibu"

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