mohabbat ho gaii hai ab mujhe ruswaiyon se kya | मोहब्बत हो गई है अब मुझे रुसवाइयों से क्या

  - Ishq Allahabadi

मोहब्बत हो गई है अब मुझे रुसवाइयों से क्या
क़लन्दर को तुम्हारी दहर और रानाइयों से क्या

अजल से हो मुहब्बत ये मुहब्बत का तक़ाज़ा है
ये दरिया जानलेवा है मगर गहराइयों से क्या

हुआ नाज़ा कमाल-ए-इश्क़ भी ज़ात-ए-मुकम्मल पर
तू हाल-ए-इश्क़ में ग़र्क़ां तुझे तन्हाइयों से क्या

मकीं जो क़ल्ब में इश्क़-ए-अदा-ए-यार हो जाए
जिसे दिल देख लेता है उसे बीनाइयों से क्या

  - Ishq Allahabadi

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