vo meri neend to main uskaa KHvaab ban jaaun | वो मेरी नींद तो मैं उसका ख़्वाब बन जाऊँ

  - Ishq Allahabadi

वो मेरी नींद तो मैं उसका ख़्वाब बन जाऊँ
मैं उसके लम्हों की पूरी किताब बन जाऊँ

ख़ुदाया मुझको नसीब ऐसा कोई रोज़ भी हो
अगर वो प्यासी रहे तो मैं आब बन जाऊँ

वो इक सवाल है जिसका कोई जवाब नहीं
मगर हो क्या ही जो उसका जवाब बन जाऊँ

है एक शम्मा जो जलती है सुर्ख़ सूरज सी
मैं उसका मोम बनूँ उसका ताब बन जाऊँ

वो मयकदे में जो आए तो काश ऐसा हो
मैं उसके जाम की छलकी शराब बन जाऊँ

लिबास अपने बदन पर हया का रखती है
जड़ा लिबास में हीरा नयाब बन जाऊँ

वो इक फ़लक है समेटे हुए सितारों को
मैं उस फ़लक का कोई माहताब बन जाऊँ

  - Ishq Allahabadi

Khwab Shayari

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