मिरा मन डोले रह-रह कर तेरे तन पर
नज़र में जिस्म और आँखें हैं दामन पर
मिरे होंठों पे लोहा लग गया है और
इन्हें दिखती है चुम्बक तेरी गर्दन पर
नजूमी राहु से बच निकला था मैं लेकिन
थी भारी एक औरत मेरे जीवन पर
नहीं लौटे ये मजनूँ तेरे कूचे में
मिरी लैला ये दिल अब आ गया वन पर
तिरे गेसू के पेंचे गोया नागिन चाल
तिरी आँखें गई है नाग के फन पर
मुहब्बत में छुपाया थोड़ी जाता कुछ
दिखा मेरी निशानी अपनी गर्दन पर
जलन मारे फटे जाते हैं ये बादल
तिरी ज़ुल्फ़ें हैं भारी पूरे सावन पर
— Jagveer Singh















