कितनी भी हो धार नहीं हो पाएगा
इश्क़ कभी तलवार नहीं हो पाएगा
जग चाहे तो दे-दे फिर हम को फाँसी
हम से क़त्ल-ए-यार नहीं हो पाएगा
जो मांझी था डूब चुका है पानी में
या'नी जीवन पार नहीं हो पाएगा
हम झूठों से भी बढ़कर झूठे है पर
हम से झूठा प्यार नहीं हो पाएगा
मैं कहता हूँ फ़ोन हटा अब आ कर मिल
वो कहता है यार नहीं हो पाएगा
वो जिस पर अधिकार जमाना था 'जानिब'
उस पर ही अधिकार नहीं हो पाएगा
— Janib Vishal















