ऐसे बैठे हैं हम उस की चौखट पर

प्यासा जैसे बैठा रहता पनघट पर

पर्दा करना हुस्न छुपाना नइँ होता
पहरे का आरोप ग़लत है घूँघट पर

— Jatin shukla

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Jalwa Shayari

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