अपनी आँखों से किसी दिन ये तमाशा देखना
दर्द में रोते हुए ख़ुद को ही तन्हा देखना
पहले तुम सीखो ज़रा तैराकी का हर इक हुनर
साथ चलते चलते फिर हर एक दरिया देखना
"शाज़" घर से दूर तो बस अजनबी ही मिलते हैं
जब कभी घर जाओ तो कोई शनासा देखना
— Meem Alif Shaz
दर्द में रोते हुए ख़ुद को ही तन्हा देखना
पहले तुम सीखो ज़रा तैराकी का हर इक हुनर
साथ चलते चलते फिर हर एक दरिया देखना
"शाज़" घर से दूर तो बस अजनबी ही मिलते हैं
जब कभी घर जाओ तो कोई शनासा देखना
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