hai samajhdaar to ye ishaara samajh | है समझदार तो ये इशारा समझ

  - Meem Alif Shaz

है समझदार तो ये इशारा समझ
अपनी शोहरत को तू इक नज़ारा समझ

जो हुआ सो हुआ अब भुला दे उसे
इस मोहब्बत को मेरी दुबारा समझ

उस की बाहों में भी तू अगर ख़ुश नहीं
बेवफ़ाई का इस को इशारा समझ

बात गर चाँद से हो न पाई तिरी
इस मुलाक़ात को इक नज़ारा समझ

'इश्क़ के बाद भी तू अगर है उदास
इस इनायत को अपना ख़सारा समझ

हम बड़ों की दुआएँ भी ली है अगर
दरिया के हर भँवर को किनारा समझ

  - Meem Alif Shaz

Sad Shayari

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