है समझदार तो ये इशारा समझ
अपनी शोहरत को तू इक नज़ारा समझ
जो हुआ सो हुआ अब भुला दे उसे
इस मोहब्बत को मेरी दुबारा समझ
उस की बाहों में भी तू अगर ख़ुश नहीं
बेवफ़ाई का इस को इशारा समझ
बात गर चाँद से हो न पाई तिरी
इस मुलाक़ात को इक नज़ारा समझ
'इश्क़ के बाद भी तू अगर है उदास
इस इनायत को अपना ख़सारा समझ
हम बड़ों की दुआएँ भी ली है अगर
दरिया के हर भँवर को किनारा समझ
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