मैं हरदम तेरी तस्वीर बनाता रहता हूँ
ऐसे तुझ को अपने पास बुलाता रहता हूँ
इक चादर का पल्लू तेरी आँखों पे रख के
तू शर्माती भी है तुझ को बताता रहता हूँ
कोई रंग तिरे होटों पे जब रह जाता है
अपने होटों से फ़िर उस को हटाता रहता हूँ
तेरी काली ज़ुल्फ़ों को इक बार भिगो कर ही
तुझ को बारिश का अहसास दिलाता रहता हूँ
तुझ को बाहों में लेता हूँ लेकिन होले से
तुझ को फिर बिस्तर पे रख के सुलाता रहता हूँ
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Meem Alif Shaz
our suggestion based on Meem Alif Shaz
As you were reading Diversity Shayari Shayari