मेरे बग़ीचे में मोहब्बत का शजर कैसा लगा
बेघर परिंदों के लिए फूलों का घर कैसा लगा
ये मौत तो देती नहीं मौका सँभलने का कभी
जो डूबा वो कैसे बताए ये भँवर कैसा लगा
हर नज़्म का उनवान तेरे नाम पर ही रख दिया
तुम को हमारे इश्क़ करने का हुनर कैसा लगा
— Meem Alif Shaz















