अच्छा नहीं तो कोई बुरा कर हिसाब कर
नींदें लुटी हैं कितनी तू आ कर हिसाब कर
बस इतना याद रखना के हम दोनों एक थे
अब एक में से एक घटा कर हिसाब कर
ये बात ठीक है नहीं ज़ख़्मी न छोड़ तू
जब ज़ख़्म हैं दिए तो दवा कर हिसाब कर
देखो के इस जुदाई से ज़िंदा मैं बच गया
सीने में कोई पार छुरा कर हिसाब कर
शय को जला के छोड़ना इंसाफ़ तो नहीं
जो पेड़ था हरा तू हरा कर हिसाब कर
— Junaid Shaad















