होंटों तलक भी ला कि तुझे मुझ से प्यार है

ताकि लगे पता कि तुझे मुझ से प्यार है

हर इक सितम को समझा मुहब्बत का कुछ बदल
कितना यक़ीन था कि तुझे मुझ से प्यार है

ज़ालिम बड़ी है हम को ये मिलने न देगी फिर
दुनिया को मत बता कि तुझे मुझ से प्यार है

आमद हुई थी रब की मगर तू कि बद-नसीब
ये तक न कह सका कि तुझे मुझ से प्यार है

पड़ जाए दिल को चैन तू कह दे अगर मुझे
बस एक मर्तबा कि तुझे मुझ से प्यार है

नज़रें उठा के यार तिरे देखने पे बस
जाने ये क्यूँ लगा कि तुझे मुझ से प्यार है

खा कर क़सम तू जान की अपनी मुझे बता
तू ने कहा न था कि तुझे मुझ से प्यार है

— Junaid Shaad

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