एक दिन

एक दिन
जब दिल और दिमाग़ आलस के सफ़र में होंगे
जब ज़िन्दगी भी थोड़ा आराम फ़रमा रही होगी
वो दिन अलग सी छुट्टी का दिन होगा
जब पुरानी यादों के रहगुज़र से गुज़रने के बजाए
मैं नई यादों के तलाश में होऊँगा
कुछ नया करने का जुनून होगा
मेरी बाहों के आग़ोश में सिर्फ़ सुकून होगा
जब साहिल पर पहाड़ खड़े हुए दिखेंगे
और झरने समुंदर में मिलते दिखेंगे
मुझे ऐसा एक दिन चाहिए

जिस दिन सूरज भी देर तक सफ़र में हो
जब चाँद का भी घर जाने का मन न करे
जैसे कभी कभी मैं दफ़्तर में देर तक रहता हूँ
तारे भी थोड़ा सा ओवरटाइम करें
या फिर कोई दिन
जो खुले आसमाँ की तरह अपनी बाँहों को खोले
मुझे ऐसा एक दिन चाहिए
जब मैं अपने दिल में दबी यादों को
ज़ख़्मों को ग़मों को
बे-रंग आँसुओं में तब्दील कर के
ख़ुशी के झरनों में तब्दील कर के
किसी समुंदर में घोल दूँ
मुझे ऐसा एक दिन चाहिए

— Saurabh Yadav Kaalikhh

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