"कैसे हो तुम"

काफ़ी वक़्त गुज़र गया
तुम से बात नहीं हुई
उम्मीद है तुम अच्छे होगे
ख़ैर मैं भी ठीक हूँ
या यूँ कहा जाए
तेरा जो हाल है
मेरा वो हाल है

सब कितना तेज़ बदलता है ना
वक़्त बदलता है
बदल जाता है मौसम
बदले हैं हम
साथ बदल जाते हैं
हमारे चेहरे चेहरे की शिकन
माथे पर लकीरें भी बढ़ जाती हैं
वक़्त के साथ साथ
उम्र के साथ साथ

सूरज भी डूब गया
ये शाम भी गुज़र जाएगी
धीरे धीरे
ये आग भी बुझ जाएगी
बुझ जाएगी ये सिगरेट भी
और बुझ जाऊँगा मैं भी
इस इंतिज़ार में
कि तुम
कभी तो मुझ से पूछोगे
कैसे हो तुम
कैसे हो तुम

— Saurabh Yadav Kaalikhh

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