usko firaq-e-yaar ka matlab nahin pata | उसको फ़िराक़-ए-यार का मतलब नहीं पता

  - Kaif Uddin Khan

उसको फ़िराक़-ए-यार का मतलब नहीं पता
मतलब उसे भी प्यार का मतलब नहीं पता

मरना तो चाहते हैं मगर क्या करें कि जब
साँसों को इख़्तियार का मतलब नहीं पता

मुझको भी अब यक़ीन किसी बात पर नहीं
उसको भी एतबार का मतलब नहीं पता

रखते हो तुम हिसाब ग़म-ए-ज़िंदगी का जो
क्या तुमको बेशुमार का मतलब नहीं पता

उस सेे गिला करें भी अगर हम तो किस लिए
जिसको कि ग़म-गुसार का मतलब नहीं पता

गो कर रहा है गुल की हिफाज़त शजर, मगर
पतझड़ को नौ-बहार का मतलब नहीं पता

अहद-ए-वफ़ा-ए-यार का मतलब पता है पर
बाद-ए-फ़िराक़-ए-यार का मतलब नहीं पता

  - Kaif Uddin Khan

Shajar Shayari

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