वादे सभी कहाँ पूरे हो सके वफ़ा मेंसदमा उठा रही हैं यादें यही नशा मेंहोने लगे सभी से हम दूर जानते होख़्वाहिश सिमट गई है अब तो मेरी ख़ुदा में— Kajiimran