
अब किसी और से लाहक़ है मोहब्बत तुझ को
अब किसी और का चेहरा तेरा आईना है
अब नहीं मुझ को मुयस्सर तेरे होंटों की शराब
अब मुझे फिर से वही ख़ून-ए-जिगर पीना है
— Kazim Rizvi
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