ab to mere khyaal se aage nikal gaya | अब तो मेरे ख़याल से आगे निकल गया

  - Khalid Azad

अब तो मेरे ख़याल से आगे निकल गया
ये 'इश्क़ ख़द-ओ-ख़ाल से आगे निकल गया

मेरा रक़ीब ग़मज़दा रहने लगा है अब
मैं उस के जो मजाल से आगे निकल गया

सैयाद सोच में है घर अब जाऊँ किस तरह
जब इक परिंदा जाल से आगे निकल गया

फिरता रहा मैं सच यहाँ ले के इधर उधर
वो झूठ के मक़ाल से आगे निकल गया

फिर रंग क़ायनात के मुझ पे खुले यहाँ
जब हुस्न व जमाल से आगे निकल गया

मैं अपने अब नसीब से कैसे गिला करूँँ
जब उस के देखभाल से आगे निकल गया

  - Khalid Azad

Khyaal Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Khalid Azad

As you were reading Shayari by Khalid Azad

Similar Writers

our suggestion based on Khalid Azad

Similar Moods

As you were reading Khyaal Shayari Shayari