कब यहाँ कोई है सगा मेरा
फिर भी सब से है राब्ता मेरा
पहले आँसू छिपाए है ख़ुद के
तब कहीं जा के घर चला मेरा
रूह अब भी सफ़र पे है मेरी
जिस्म कब का ये थक चुका मेरा
मुझको सूरज की आरज़ू क्यूँ हो
जब दिया काम कर गया मेरा
कैसे ग़म से जुदा में हो जाऊँ
बस वही साथ दे रहा मेरा
कश्ती डूबी थी बाद में मेरी
पहले डूबा था हौसला मेरा
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