abhii tak ja'alsaazi kar rahe hain | अभी तक जा'लसाज़ी कर रहे हैं

  - Khalid Azad

अभी तक जा'लसाज़ी कर रहे हैं
मोहब्बत जो मजाज़ी कर रहे हैं

कहीं लहरों से नफ़रत हो न इक दिन
ये बच्चे ख़ाक-बाज़ी कर रहे हैं

बना पाए ना एक दिल 'उम्र भर जो
वो कैसे संग-साज़ी कर रहे हैं

जिसे कुछ भी नहीं हासिल हुआ है
वही अब कार-साज़ी कर रहे हैं

नये लड़के मोहब्बत के सफ़र में
बहुत ही जल्दबाज़ी कर रहे हैं

कभी जो जान मुझ पे दे रहे थे
वही अब बे-नियाज़ी कर रहे हैं

उसे पाने की ख़्वाहिश में ही ख़ालिद
चलो ख़ुद को नमाज़ी कर रहे हैं

  - Khalid Azad

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