लोगों ने बस चेहरा चेहरा देखा है
किसने मुझको अंदर मरता देखा है
कितनी उम्मीदों का बोझ वो सह पाता
शायद उसने डर से पंखा देखा है
जो लोगों के घर में आग लगाता है
मैने उसका घर भी जलता देखा है
कल बाज़ार में एक दिवाना चीख़ उठा
मैंने क़ैस को ख़ुद में ज़िंदा देखा है
शायद तुमको और किसी का होना है
मैंने कल इक ख़्वाब अधूरा देखा है
वक़्त की फितरत करवट लेना है अक्सर
शाहों के हाथों में कासा देखा है
सबने राहें पकड़ी अपनी मंज़िल की
मैंने तो बस तेरा रस्ता देखा है
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