charaago ke safar ko ab mujhe aasaan karna hai | चराग़ो के सफ़र को अब मुझे आसान करना है

  - Khalid Azad

चराग़ो के सफ़र को अब मुझे आसान करना है
हवा के ज़ोर को हर हाल में हलकान करना है

उठे जब एक चिंगारी तो फिर शो’ला बताता है
कहीं पे फिर किसी घर को उसे वीरान करना है

बुलंदी पर पहुंचना हो, तो झुक कर चलना पड़ता है
इसी ख़ातिर अना को अब मुझे क़ुर्बान करना है

जवानी तुम पे लाने में बुढ़ापा मुझपे आया है
मेरे बच्चों यहाँ पे अब तुम्हें एहसान करना है

है जिस सेे डरते रहते सब लगा कर अब गले उसको
मुझे फिर ज़िंदगी को एक दिन हैरान करना है

तुम्हारा हिज्र काटूं या क़दम आगे बढ़ा लूं मैं
करूँँं जो फैसला लेकिन इसी दौरान करना है

अभी तो शे’र थोड़े हैं तेरी झोली में ऐ ख़ालिद
मगर इक दिन इसे भी मीर का दीवान करना है

  - Khalid Azad

Irada Shayari

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