इश्क़ कब ला-जवाल होता है
हाँ मगर बे-मिसाल होता है
उम्र के इक पड़ाव पे आ कर
चुप भी रहना कमाल होता है
ख़ून हम ने दिया वतन के लिए
और हमीं से सवाल होता है
पहले मैं ही उदास रहता था
अब उसे भी मलाल होता है
हिज्र के वसवसे जो दिल में हों
फिर तो जीना मुहाल होता है
— Khalid Azad















