तू रंग-ए-कायनात से ऊपर की बात है
ये ख़्वाब मेरी ज़ात से ऊपर की बात है
शायद मैं ले के जाऊँ इसे आसमाँ तलक
ये ग़म तेरा हयात से ऊपर की बात है
अब तक समझ न पाए वो छोड़ी कमान क्यूँ
ये जीत और मात से ऊपर की बात है
पानी तो मिल ही जाता जो करते वो आरज़ू
ये दजला-वो-फ़ुरात से ऊपर की बात है
सीखा है कच्ची उम्र से ही पेट काटना
हालात तजरिबात से ऊपर की बात है
शायद हवा करे भी हिफ़ाज़त चराग़ की
लेकिन ये मुमकिनात से ऊपर की बात है
— Khalid Azad















