उस ने कभी दरिया में रवानी नहीं देखी
पलकों पे लिखी अपनी कहानी नहीं देखी
हर चीज़ को देखा है जो ग़ैरों से मिली थी
इक भेजी हुई मेरी निशानी नहीं देखी
हर रोज़ सुनाती थी जफ़ाओं के वो क़िस्से
शायद किसी लैला की कहानी नहीं देखी
एल्बम जो तेरे हाथों ने तैयार किया था
तस्वीर कोई उस
में पुरानी नहीं देखी
कुछ लोग मुझे देख यहाँ रश्क़ करे हैं
बर्बाद मगर मेरी जवानी नहीं देखी
इस शहर में "ख़ालिद" तेरे दीवाने बहुत हैं
उस जैसी यहाँ कोई दिवानी नहीं देखी
— Khalid Azad















