आँसुओं से मेरी जो यारी है
ये उदासी भी कितनी प्यारी है
उस ने तो अब भुला दिया मुझ को
पर मिरी दिल से जंग जारी है
सोचता रहता हूँ मैं ये अक्सर
इश्क़ है या फ़क़त ये यारी है
मुझ को ख़ैरात में न हासिल कुछ
मैं ने ख़ुद ज़िंदगी सँवारी है
बात जो कह न पाया मैं उस से
यार वो बात कितनी प्यारी है
— Krishan Kant Saini















