कैसी राहों पे है ज़िंदगानी
अब कहाँ हैं वो बातें पुरानी
मैं ग़ज़ल ही तो कहता रहा बस
आ न पाई मोहब्बत जतानी
एक किरदार ही तो हटाया
बदली कैसे ये सारी कहानी
मेरी आँखों में है अक्स तेरा
मेरी बातों में तेरी कहानी
— Krishan Kant Saini
अब कहाँ हैं वो बातें पुरानी
मैं ग़ज़ल ही तो कहता रहा बस
आ न पाई मोहब्बत जतानी
एक किरदार ही तो हटाया
बदली कैसे ये सारी कहानी
मेरी आँखों में है अक्स तेरा
मेरी बातों में तेरी कहानी
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling