क्यूँँ वो ग़म याद दिलाता है मुझे

क्यूँ तू वो बातें सुनाता है मुझे

दिख न पाएँ मुझे वो ग़म उस के
इतना वो हँस के दिखाता है मुझे

दिन की तो बात नहीं कोई मगर
दिल ये रातों में जगाता है मुझे

बे-वफ़ाई तो बहुत दूर है अब
अब तो वो दिल में बसाता है मुझे

प्यार तो करता है पर मुझ से नहीं
ये ख़याल अब तो रुलाता है मुझे

— Krishan Kant Saini

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