लिख दिया प्यासा समुंदर और सहरा नम लिखा
अश्क, दरिया थे खड़े दरिया का पानी कम लिखा
लिख रहा था नाम अपनों के तभी ऐसा हुआ
जब तुम्हारा नाम आया रुक गया फिर हम लिखा
एक पत्ता पेड़ से कुछ इस तरह से था जुड़ा
वो जुदा ऐसे हुआ हर शाख़ पर शबनम लिखा
बस लिखा था नाम फिर काग़ज़ धड़कने ही लगा
किस तरह काग़ज़ पकड़ धड़कन को फिर मद्धम लिखा
रूह पर जब ज़ख़्म हों तो फिर दवा है बे-असर
ज़ख़्म ये बढ़ता रहा तो दर्द को मरहम लिखा
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