shajar karta rahe saaya shajar par kiska saaya hai | शजर करता रहे साया शजर पर किसका साया है

  - Divya 'Kumar Sahab'

शजर करता रहे साया शजर पर किसका साया है
उठाती है धरा सब कुछ इसे किसने उठाया है

हुई आवाज़ कैसी ये, ये किसने खटखटाया है
चले आए मेरे दिल में पता किसने बताया है

रुकी यादें झुकी आँखें बिना खाए जो सोया हूँ
मिले आकर वो बोले सुब्ह से कुछ तुमने खाया है

न जाने ढूँढ़ते हैं क्या ये सूरज चाँद तारे सब
जलाया है इन्हें किसने इन्हें किसने बुझाया है

बताऊँ राह कैसे तक रहा है आज तक ये दिल
समझ कर तुम हो हर अनजान नम्बर को उठाया है

मिले हैं फ़ासले जितने घटी दूरी न जाने क्यूँ
हुआ है दूर वो जितना यहाँ उतना समाया है

  - Divya 'Kumar Sahab'

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