tum kho do sab kuchh gar us din kaho tumhaara kya hogaa | तुम खो दो सब कुछ गर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा

  - Divya 'Kumar Sahab'

तुम खो दो सब कुछ गर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा
मैं बोलूँ बस ख़ंजर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा

नीर चुराते हो सागर से बारिश कर इतराते हो
जिस दिन उठा समंदर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा

दीपक और पत्तों पर झोंके ये जो अकड़ दिखाते हैं
जिस दिन चला बवंडर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा

जो तेवर ये दिखलाते हैं राजा बनकर लोगों पर
जिस दिन मिला सिकंदर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा

झूठ कहोगी फिर तुम पकड़ी जाओगी समझी, जो मैं
मिला तुम्हारे अंदर उस दिन कहो तुम्हारा क्या होगा

  - Divya 'Kumar Sahab'

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