"इक लड़की"
ये पूरी दुनिया बहुत अच्छी लगती है
जब वो लड़की रस्ता मेरा तकती है
फिर ये दुनिया सारी अपनी लगती है
जब प्यार से बाहों में वो लड़की भरती है
और ये सारी दुनिया एक तरफ़ है
या'नी बाक़ी एक तरफ़ वो लड़की है
चेहरे की उस की मासूम वो हँसी
जैसे मुझ को जीवन नया अता करती है
फिर मुझ अधूरे से लड़के को
साथ आ कर मेरे वो पूरा करती है
सारे ख़्वाब भी पूरे होने लगते हैं
जब मेरे साथ वो लड़की रहती है
सच पूछो तो वो लड़की इस नादान लड़के को
आ कर नादान से वो समझदार करती है
उस प्यारी सी लड़की को मैं क्या कहूँ
मेरी हर ग़ज़ल को वो मुकम्मल करती है
वो लड़की मेरी ग़ज़ल के मतले से शुरू होकर
शे'र क़ाफ़िया रदीफ़ से होकर मक़्ते पर रुकती है
वो लड़की कभी बहर में तो कभी
बिना बहर के भी ख़ूब-सूरत लगती है
साथ में उस के चार क़दम बस चल पाऊँ
मेरी ख़ुदा से बस यही दुआ रहती है















