"ज़माना और उन के रंग"
ज़माना मेरे ख़िलाफ़ जहर उगल सकता है
इस
में कौन कहाँ किसी को रोक सकता है
अब इन ज़ेहनी बीमार लोगों की फ़ितरत से
कैसे कोई अपनी मंज़िल को भूल सकता है
हर दफ़ा मेरी फिर से उठने की शिद्दत को
हर बार यहाँ कोई न कोई तोड़ सकता है
और क्या उस टूटने और गिरने के डर से
कैसे कोई कोशिश करना छोड़ सकता है
ये ज़माना है जनाब यहाँ अक्सर ये सब
यहाँ दिल हर रोज़ दुखाया जा सकता है
आसमाँ में उड़ते आज़ाद हर उस परिंदे के
यहाँ कोई भी उस के परों को काट सकता है
कामयाबी के शिखर में पहुँचे हुए लोगों को
कोई कभी भी उन्हें शिखर से उतार सकता है















