न हो उस तरफ़ रुख़ दुआ कीजिएगा

वफ़ा की गली आप क्या कीजिएगा

दुआ कीजिएगा तो ये याद रखना
वफ़ा की दुआ को क़ज़ा कीजिएगा

यूँ कब तक पढ़ेंगे वफ़ा की दुआएँ
किसी को वफ़ा भी अता कीजिएगा

ये कैसी मोहब्बत सज़ा ही सज़ा है
मोहब्बत हमें कब जज़ा कीजिएगा

हमें इस क़फ़स में पड़ा रहने दीजे
कि मर जाएँगे गर रिहा कीजिएगा

मोहब्बत नसीबों में है क्या हमारे
ख़ुदा क्या कभी मो'जिज़ा कीजिएगा

हमें भी कभी वो नज़र भर के देखें
हवाओं ज़रा रास्ता कीजिएगा

न आसाँ कोई निकले हम सा यहाँ फिर
जो क़ातिल से कह दे शिफ़ा कीजिएगा

मोहब्बत को समझे तो समझा ये हम ने
मोहब्बत समझ के भी क्या कीजिएगा

— Lekhak Suyash

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