तेरे ख़ातिर हुआ हूँ ऐसे रुसवाअजब औबाश बन कर रह गया हूँकि मेरी रूह तो तुम मार डालेमैं ज़िंदा लाश बन कर रह गया हूँ— Marghoob Inaam Majidi