दिलों में तुम बनालो धाम कोई

करो ऐसा जगत में काम कोई

कहा किस ने ज़माना प्रेम का है
कहीं दौलत तो देखे चाम कोई

नहीं दिखती मुझे राधा कहीं अब
नहीं दिखता कहीं अब श्याम कोई

नहीं होती है सीता इस जगत में
नहीं होता यहाँ अब राम कोई

नहीं दिखती कहीं ईमानदारी
बिकेंगे सब सही दे दाम कोई

समय भी अब निकट है जय तुम्हारा
रहेगी आख़िरी ही शाम कोई

— Jaypratap chauhan

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