अब बस 'इश्क़ अकेली ही तो ऐसी बीमारी है
जिसको हो उस
में कब ज़िंदा रहती ख़ुद्दारी है
वो लड़का हर पल इक चक्की में पिसता रहता है
जिस आशिक़ के कंधों पर घर की ज़िम्मेदारी है
पूछें लोग कि ऐसा क्या तुमने उस
में देखा है
देखो मेरी नज़र से वो लड़की सब सेे प्यारी है
मुझको पता है अब अपनों के हाथों में ख़ंजर है
पर क्या कर सकता हूँ इन सब सेे रिश्तेदारी है
इस दुनिया में मुझको ख़ुशियाँ नसीब कब होती हैं
मेरी क़िस्मत पर रहती ग़म की पहरेदारी है
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