ख़ुद को तो सब सही दिखाते हैं
आइने को सभी सताते हैं
बाप परवाह करते हैं सबकी
बाप परवाह कब जताते हैं
पेज तो अब बदल रहे हैं पर
चित्र हम एक ही बनाते हैं
एक लड़की हुई नहीं मेरी
फिर कहाँ ख़ुद को हम सजाते हैं
हमने जिनको दिखाई थी दुनिया
आँख हमको वही दिखाते हैं
आग जिनको बुझानी थी प्यारे
आग अब बस वही लगाते हैं
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