तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं
वहम उल्फ़त के कितने प्यारे हैं
हम को हैरत है हम ने आख़िरकार
बा'द भी उन के दिन गुज़ारे हैं
सारी दुनिया हमारे क़दमों में है
हम जो हारे तो ख़ुद से हारे हैं
यूँ ही ज़िद पर अड़ा है दिल वरना
कार-ए-दिल में बहुत ख़सारे हैं
शब-ए-ज़ुल्मत के आसमाँ पर कुछ
अब भी उम्मीद के सितारे हैं
ज़िंदगी के सफ़र में जान-ए-सफ़र
बस तिरी याद के सहारे हैं
चाँद तारे ये फूल ये ख़ुशबू
सब तिरे होने के इशारे हैं
यूँ ही क़िस्मत मिरी सँवर जाती
जिस तरह गेसू ये सँवारे हैं
नहीं मुमकिन हमारा वस्ल कि हम
एक दरिया के दो किनारे हैं
और क्या चाहिए दिल-ए-नाकुश
चाँदनी शब है चाँद तारे हैं















