न मेरा है न किसी और के बाप का सूरजहै इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरजगुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हाके एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज— Amaan mirza