ख़ुद बनानी हैं चाबियाँ तुम को
लोग बख्शेंगे बेड़ियाँ तुम को
इश्क़ ऊपर है सब मज़ाहिब से
कौन समझाए अब मियाँ तुम को
आके चहरे पे बैठ जाएँगी
देख लें गर ये तितलियाँ तुम को
जो मुनासिब लगे वो करना तुम
मैं ने भेजी हैं बालियाँ तुम को
मैं बताता हूँ जीत का मंतर
फूंकनी होंगी बस्तियाँ तुम को
— Monis faraz















