दिल पर तुम्हारे नाम का क़श्क़ा लगा के मैं
मजमे से दूर बैठा हूँ सहारा में आ के मैं
मुझ को ये डर कि मैं कहीं वा'दा न तोड़ दूँ
निकला हूँ घर से सागर ओ मीना उठा के मैं
अब क्या बताऊँ आप से क्या चाहता है दिल
रख दूँ न होंट आप के होंटों पे ला के मैं
मैं ने भी अब के तुझ को भुलाने की ठान ली
ले आ गया ख़ुतूत में तीली लगा के मैं
हालत पे मेरी आप लगाते हैं क़हक़हा
पछता रहा हूँ आप को हालत बता के मैं
— Monis faraz















