इश्क़ में लानत हिज्र ख़सारा सब कुछ है
तेरी ख़ातिर हम को गवारा सब कुछ है
दिल की बातें अब नहीं तो फिर कब होंगी
तू है मैं हूँ झील किनारा सब कुछ है
माँ का प्यारा बाप का मुझ पे साया भी
समझा कुछ तू मेरा इशारा सब कुछ है
जन्नत में भी और भला क्या ही होगा
गाँव खेत है पेड़ फवारा सब कुछ है
बाक़ी दुनिया अब तो हमें बेमानी है
अपना तो हारे का सहारा सब कुछ है
— Mukesh Guniwal "MAhir"















