कर्म करूँँ और फल का लालच नइँ रक्खूँयार भला ये कैसी बातें करते होअपने दम तो इंसाँ हो जाते हो तुममुझ से ख़ुदा के जैसी बातें करते हो— Mukesh Guniwal "MAhir"