फ़क़त इक शख़्स था आदत हमारी
वो जिस पे ख़त्म थी चाहत हमारी
हिफ़ाज़त जिस की शोहरत की तरह की
किसी ने छीन ली दौलत हमारी
उन्हें हम माँग लेते हैं दुआ में
मगर ऐसी नहीं क़िस्मत हमारी
मुहब्बत में हुआ दिल का अजब हाल
तबीअत में नहीं हालत हमारी
मुक़द्दर में नहीं जब एक वो शख़्स
सदा क़ाएम रहे ख़ल्वत हमारी
बहेंगे अश्क ना-उम्मीदी बन कर
भरी हैं आँखों में उल्फ़त हमारी
इबादत है हमें उन की मुहब्बत
मुहब्बत है उन्हें आफ़त हमारी
— Muntazir shrey















