हिरमाँ में हम इस तौर ख़सारा करते हैं
तस्वीर है उस की जो निहारा करते हैं
वो रूठ ही जाते हैं मिरे लहजे से
ख़ामोशी भी मेरी न गवारा करते हैं
वो शक्ल बनाते हैं ख़फ़ा हो कर मुझ से
फिर और भी रुख़्सार को प्यारा करते हैं
रब जाने कि क्या चल रहा है दिल में उन के
वो देख हमें ज़ुल्फ सँवारा करते हैं
— Muntazir shrey















